Join our Community!

Subscribe today to explore captivating stories, insightful articles, and creative blogs delivered straight to your inbox. Never miss out on fresh content and be part of a vibrant community of storytellers and readers. Sign up now and dive into the world of stories!


मेरी मातृभाषा हिंदी

hindi

मैं बहुत गर्व महसूस करती हूँ कि मेरी मातृभाषा हिंदी है। हमें क्या मालूम होता है कि हमारी भाषा कब, कैसे और कौन निश्चित करेगा! माँ की गोद में जब पहली बार मेरे मुख से कुछ शब्द माँ-बाबा ने कहलवाए होंगे और मेरे कानों में वह बोली गूंजी होगी, तब जिन शब्दों का उच्चारण किया वही मेरी मातृभाषा या माँ की भाषा कहलायी।

जिस भाषा की वर्णमाला सीखी, शब्द और वाक्य बनाने सीखे, और फिर व्याकरण भी आया, जिसमें अपनी भाषा को सही ढंग से लिखना और पढ़ना आया। पहले माँ, फिर स्कूल की अध्यापिका हमारी सहायक बनी। धीरे-धीरे उम्र के साथ मेरी सोच बढ़ी और लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करना आने लगा। स्कूल की हिंदी की किताबों ने ज्ञान विस्तृत किया।

कुछ बड़े हुए तो पुस्तकालय से अपनी पसंदीदा हिंदी की पुस्तकें ला पढ़ने लगे। ख़ूब आनंद आता था। समय जैसे पंख लगा उड़ता रहा। स्कूल की बारह कक्षाएं पास कर कॉलेज में भर्ती हुए। वहाँ का वातावरण देख मेरी तो दुनिया बदल गई, मैं कुछ नर्वस हो गई। आपस में कोई हिंदी में बात नहीं करता था। धीरे-धीरे हमने भी अंग्रेज़ी बोलकर संपर्क बनाए।

पता चला कि हम जैसी कुछ और लड़कियाँ हैं जो हिंदी भाषा को आगे ले जाना चाहती हैं। हमने निर्णय लिया कि क्यों न कॉलेज में हिंदी क्लचरल सोसायटी की शुरुआत करें। हमारी दोनों हिंदी की प्रोफ़ेसर ने इस सुझाव को स्वीकार किया। हम उत्साहित होकर अपने-अपने कार्यों में लग गए।

वर्ष 1972 की बात है, जब हम दो सखियाँ कवि संतोष आनंद जी के घर उन्हें न्यौता देने गए, पर व्यस्तताओं के कारण उन्होंने निमंत्रण स्वीकार नहीं किया। फिर हमने प्रतिष्ठित कवि आ. भारत भूषण जी को निमंत्रण दिया, और उनके साथ एक ऑस्ट्रेलियन फादर भी आए, जो भारत में रहकर कबीर पर रिसर्च कर रहे थे। हमने अपनी रचनाएँ उनके समक्ष पढ़ीं और उन्हें हमारी पुस्तकों “कागज़ के फूल” से पुरस्कृत किया। ऑस्ट्रेलियन फादर ने हिंदी में प्रथम पृष्ठ पर लिखा, “हरि को भजे सो हरि को होई।” वह पल आज भी अनमोल है।

हमारी प्रोफ़ेसर हमारी प्रेरणा स्त्रोत रहीं। उनकी प्रेरणा से नृत्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें कथक नृत्यांगना उमा शर्मा जी की प्रस्तुति ने चार चाँद लगा दिए।

1973 में कॉलेज के अंतिम वर्ष में नाटक की तैयारी हुई। हमारी प्रोफ़ेसर ने मन्नू भंडारी का “आपका बंटी” चुना। पात्रों के चुनाव और संवाद की प्रक्रिया पूरी हुई, और मैं बनी बंटी। इस नाटक के साथ हम पिलानी के वार्षिक उत्सव “ओएसिस” में शामिल हुए।

हिंदी भाषा के इस मंच ने मुझे अनेक अनुभव दिए। उन लेखकों और कवियों के बारे में पढ़ने और सुनने का अवसर मिला, जिनकी कृतियाँ पहले सिर्फ़ किताबों में पढ़ी थीं। 1000 वर्ष पूर्व हिंदी का प्रयोग साहित्य में प्रारंभ हुआ। इसकी उत्पत्ति संस्कृत, पाली, प्राकृत और अपभ्रंश से हुई। आधुनिक काल में अमीर ख़ुसरो और भक्तिकाल के कवियों ने योगदान दिया। 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान ने इसे राजभाषा का दर्जा दिया।

अब हिंदी में अरबी, फ़ारसी और अंग्रेज़ी के शब्द भी शामिल हैं। भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। पश्चिम में हरियाणवी, ब्रज, बुंदेली; पूर्व में हिंदी, अवधि और छत्तीसगढ़ी; भोजपुरी, मैथिली; पहाड़ों में कुमाऊनी और गढ़वाली।

लेकिन हिंदी भाषा कितने ही रूप धर ले, जो माँ के मुख से निकले शब्द प्रथम बार हमारे मुख में जाते हैं, वही हमारी मातृभाषा बनती है। जिसमें हम खुलकर सोच सकें, अपने विचार रख सकें और भावनाओं को सुंदर रूप दे सकें, वह भाषा सिर्फ मातृभाषा हो सकती है। अन्य भाषाओं को सीखने में कोई हर्ज नहीं है, पर अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए।


अगर आपको मेरी मातृभाषा हिंदी पर यह ब्लॉग पसंद आया हो, तो अपने विचार नीचे कमेंट में साझा करें।

– मीनाक्षी जैन

Writer Author Meenakshi Jain

लेखक परिचय: मीनाक्षी जैन

  • जन्म स्थान – दिल्ली
  • शिक्षा – दिल्ली
  • योग्यता – क्लिनिकल साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन

मीनाक्षी जैन ने विदेशी सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर भारत के दूर-दराज़ गांवों में पेंटोमाइम के माध्यम से शिक्षा से जुड़े कई कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने दूरदर्शन पर भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।

इनकी लेखनी समाज, संस्कृति और मानवीय भावनाओं की गहरी समझ को उजागर करती है।

इनकी रचनाएँ न केवल पाठकों को सोचने पर मजबूर करती हैं, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर भी प्रदान करती हैं। इनके कार्यों में गहरी विचारशीलता और संवेदनशीलता झलकती है, जो पाठकों को प्रेरित करती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top